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mahabharat 7.88.21: आर्य! तब श्रीकृष्ण ने भी अर्जुन के साथ बिना किसी संकोच के अपने श्रेष्ठ शंख पाञ्चजन्य को बलपूर्वक बजाया॥21॥   |   mahabharat अध्याय 7.88: कौरव-सेनाके लिये अपशकुन, दुर्मर्षणका अर्जुनसे लड़नेका उत्साह तथा अर्जुनका रणभूमिमें प्रवेश एवं शंखनाद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 88: कौरव-सेनाके लिये अपशकुन, दुर्मर्षणका अर्जुनसे लड़नेका उत्साह तथा अर्जुनका रणभूमिमें प्रवेश एवं शंखनाद  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.88.21 
अथ कृष्णोऽप्यसम्भ्रान्त: पार्थेन सह मारिष।
प्राध्मापयत् पाञ्चजन्यं शङ्खं प्रवरमोजसा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
आर्य! तब श्रीकृष्ण ने भी अर्जुन के साथ बिना किसी संकोच के अपने श्रेष्ठ शंख पाञ्चजन्य को बलपूर्वक बजाया॥21॥
 
Arya! Then Shri Krishna also blew his best conch Panchajanya with force without any hesitation with Arjun. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)