श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 88: कौरव-सेनाके लिये अपशकुन, दुर्मर्षणका अर्जुनसे लड़नेका उत्साह तथा अर्जुनका रणभूमिमें प्रवेश एवं शंखनाद  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.88.14 
एवं ब्रुवन्महाराज महात्मा स महामति:।
महेष्वासैर्वृतो राजन् महेष्वासो व्यवस्थित:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजन! महाराज! ऐसा कहकर महाबुद्धिमान, अत्यन्त बुद्धिमान और महाधनुर्धर दुर्मर्षण महान् धनुर्धरों से घिरा हुआ युद्ध के लिए खड़ा हो गया॥14॥
 
Rajan! Maharaj! Saying this, that great-minded, very intelligent and great archer Durmarshan, surrounded by great archers, stood up for the war. 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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