श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 88: कौरव-सेनाके लिये अपशकुन, दुर्मर्षणका अर्जुनसे लड़नेका उत्साह तथा अर्जुनका रणभूमिमें प्रवेश एवं शंखनाद  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.88.13 
तिष्ठध्वं रथिनो यूयं संग्राममभिकाङ्क्षिण:।
युध्यामि संहतानेतान् यशो मानं च वर्धयन्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे युद्ध की इच्छा रखने वाले महारथियों! तुम सब लोग चुपचाप खड़े रहो। आज मैं इन संगठित शत्रुओं के साथ कौरव कुल की कीर्ति और प्रतिष्ठा को बढ़ाता हुआ युद्ध करूँगा।॥13॥
 
O charioteers who wish to fight! You all should stand quietly. Today I will fight with these united enemies, increasing the glory and prestige of the Kaurava clan.'॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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