श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 88: कौरव-सेनाके लिये अपशकुन, दुर्मर्षणका अर्जुनसे लड़नेका उत्साह तथा अर्जुनका रणभूमिमें प्रवेश एवं शंखनाद  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.88.11 
अद्य गाण्डीवधन्वानं तपन्तं युद्धदुर्मदम्।
अहमावारयिष्यामि वेलेव मकरालयम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जैसे समुद्र को आगे बढ़ने से तट रोक देता है, वैसे ही आज मैं युद्ध में उन्मत्त होकर लड़ने वाले और शत्रुओं को संताप देने वाले गांडीवधारी अर्जुन को रोक दूँगा॥ 11॥
 
Just as the coast stops the ocean from advancing, similarly today I will stop Arjuna, the wielder of Gandiva, who is fighting madly in the war and tormenting the enemies.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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