श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 86: संजयका धृतराष्ट्रको उपालम्भ  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.86.8 
स कृत्वा पितृकर्म त्वं पुत्रं संस्थाप्य सत्पथे।
वर्तेथा यदि धर्मेण न त्वां व्यसनमाव्रजेत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यदि तुमने अपने पुत्र को सही मार्ग पर लगाया होता, पिता के कर्तव्यों का पालन किया होता और धर्मानुसार आचरण किया होता, तो यह विपत्ति तुम पर न आती ॥8॥
 
Had you set your son on the right path, performed the duties of a father and behaved according to the Dharma, then this calamity would not have befallen you. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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