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श्लोक 7.86.16  |
तेषां तत् तादृशं कर्म त्वामासाद्य सुनिष्फलम्।
यत् पित्र्याद् भ्रंशिता राज्यात् त्वयेहामिषगृद्धिना॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| परन्तु तुम्हें पाकर उसके महान् कर्म व्यर्थ हो गये; क्योंकि राज्य के लोभ में तुमने उसे उसके पैतृक राज्य से वंचित कर दिया। |
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| But his great deeds became futile after getting you; because in your greed for the kingdom, you deprived him of his ancestral kingdom. |
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