श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 86: संजयका धृतराष्ट्रको उपालम्भ  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.86.1 
संजय उवाच
हन्त ते सम्प्रवक्ष्यामि सर्वं प्रत्यक्षदर्शिवान्।
शुश्रूषस्व स्थिरो भूत्वा तव ह्यपनयो महान्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज ! मैंने सब कुछ प्रत्यक्ष देखा है, वह सब मैं अभी आपको बताता हूँ। कृपया धैर्य रखें और सुनें। आपका महान अन्याय ही इस स्थिति का कारण है।॥1॥
 
Sanjaya says - Maharaj! I have seen everything directly, I will tell you all that right now. Please be patient and listen. Your great injustice is the reason behind this situation.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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