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mahabharat 7.85.37: यदि मैं उनसे कहूँ, तो भी वे मेरे धर्मयुक्त वचनों का उल्लंघन नहीं करेंगे, क्योंकि वीर पाण्डव धर्मनिष्ठ हैं ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 7.85: धृतराष्ट्रका विलाप   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 85: धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.85.37 
मयापि चोक्तास्ते वीरा वचनं धर्मसंहितम्।
नान्यथा प्रकरिष्यन्ति धर्मात्मानो हि पाण्डवा:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं उनसे कहूँ, तो भी वे मेरे धर्मयुक्त वचनों का उल्लंघन नहीं करेंगे, क्योंकि वीर पाण्डव धर्मनिष्ठ हैं ॥37॥
 
"Even if I ask them, they will not disobey my righteous words because the brave Pandavas are righteous." ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)