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mahabharat 7.85.11: विविंशति, दुर्मुख, चित्रसेन, विकर्ण तथा मेरे अन्य पुत्रों के घरों में अब पहले वाली हर्ष ध्वनि सुनाई नहीं देती। 11॥   |   mahabharat अध्याय 7.85: धृतराष्ट्रका विलाप   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 85: धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.85.11 
विविंशतेर्दुर्मुखस्य चित्रसेनविकर्णयो:।
अन्येषां च सुतानां मे न तथा श्रूयते ध्वनि:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
विविंशति, दुर्मुख, चित्रसेन, विकर्ण तथा मेरे अन्य पुत्रों के घरों में अब पहले वाली हर्ष ध्वनि सुनाई नहीं देती। 11॥
 
The earlier joyful sound is no longer heard in the houses of Vivimshati, Durmukh, Chitrasen, Vikarna and my other sons. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)