श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 83: अर्जुनकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये युधिष्ठिरकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना और श्रीकृष्णका उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 4-6
 
 
श्लोक  7.83.4-6 
अनुज्ञातश्च राज्ञा स प्रावेशयत तं जनम्।
विराटं भीमसेनं च धृष्टद्युम्नं च सात्यकिम्॥ ४॥
चेदिपं धृष्टकेतुं च द्रुपदं च महारथम्।
शिखण्डिनं यमौ चैव चेकितानं सकेकयम्॥ ५॥
युयुत्सुं चैव कौरव्यं पाञ्चाल्यं चोत्तमौजसम्।
युधामन्युं सुबाहुं च द्रौपदेयांश्च सर्वश:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उस समय राजा की अनुमति पाकर द्वारपाल विराट, भीमसेन, धृष्टद्युम्न, सात्यकि, चेदि राजा धृष्टकेतु, महारथी द्रुपद, शिखंडी, नकुल, सहदेव, चेकितान, केकयराजकुमार, कुरुवंशी युयुत्सु, पांचालवीर उत्तमौजा, युधामन्यु, सुबाहु तथा द्रौपदी के पांचों पुत्रों को बुला लाए। 4-6॥
 
At that time, after getting the permission of the king, the gatekeeper brought in Virat, Bhimsen, Dhrishtadyumna, Satyaki, Chedi king Dhrishtaketu, Maharathi Drupada, Shikhandi, Nakul, Sahadeva, Chekitana, Kekayrajkumar, Kuruvanshi Yuyutsu, Panchalveer Uttamauja, Yudhamanyu, Subahu and the five sons of Draupadi. 4-6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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