श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 83: अर्जुनकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये युधिष्ठिरकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना और श्रीकृष्णका उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.83.17 
त्वमगाधेऽप्लवे मग्नान् पाण्डवान् कुरुसागरे।
समुद्धर प्लवो भूत्वा शङ्खचक्रगदाधर॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले परमेश्वर! आप स्वयं नाविक बनकर, बिना नाव के कौरवों के गहरे समुद्र में डूबे हुए पाण्डवों का उद्धार कीजिए॥17॥
 
O Supreme Lord holding the conch, discus and mace! Please become a boat yourself and rescue the Pandavas who are drowned in the deep sea of ​​Kauravas without a boat.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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