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श्लोक 7.83.16  |
यथैव सर्वास्वापत्सु पासि वृष्णीन् जनार्दन।
तथैवास्मान् महाबाहो वृजिनात् त्रातुमर्हसि॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| हे महाबाहु जनार्दन! जैसे आप वृष्णियों की समस्त विपत्तियों से रक्षा करते हैं, वैसे ही इस संकट से हमारी भी रक्षा कीजिए॥16॥ |
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| Mighty-armed Janardana! Just as you protect the Vrishnis from all calamities, please protect us also from this crisis.॥ 16॥ |
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