श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 83: अर्जुनकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये युधिष्ठिरकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना और श्रीकृष्णका उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.83.16 
यथैव सर्वास्वापत्सु पासि वृष्णीन् जनार्दन।
तथैवास्मान् महाबाहो वृजिनात् त्रातुमर्हसि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे महाबाहु जनार्दन! जैसे आप वृष्णियों की समस्त विपत्तियों से रक्षा करते हैं, वैसे ही इस संकट से हमारी भी रक्षा कीजिए॥16॥
 
Mighty-armed Janardana! Just as you protect the Vrishnis from all calamities, please protect us also from this crisis.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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