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श्लोक 7.83.15  |
न हि तत् कुरुते संख्ये रथी रिपुवधोद्यत:।
यथा वै कुरुते कृष्ण सारथिर्यत्नमास्थित:॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| हे कृष्ण! युद्ध में शत्रुओं का वध करने के लिए तत्पर सारथी भी वैसा पराक्रम नहीं कर सकता जैसा एक कर्मठ सारथी कर सकता है॥ 15॥ |
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| Lord Krishna! Even a charioteer ready to kill his enemy in a battle cannot perform the same feat as a diligent charioteer can.॥ 15॥ |
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