श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 83: अर्जुनकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये युधिष्ठिरकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना और श्रीकृष्णका उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.83.14 
स भवांस्तारयत्वस्माद् दु:खामर्षमहार्णवात्।
पारं तितीर्षतामद्य प्लवो नो भव माधव॥ १४॥
 
 
अनुवाद
माधव! आज हम सब लोगों के लिए, जो इस दुःख और संताप रूपी सागर से पार जाना चाहते हैं, कृपा करके नाव बनिए। इस संकट से केवल आप ही हमारी रक्षा कर सकते हैं।॥14॥
 
‘Madhava! Today, please become the boat for all of us who wish to cross this ocean of sorrow and anger. Only you can save us from this crisis.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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