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श्लोक 7.83.14  |
स भवांस्तारयत्वस्माद् दु:खामर्षमहार्णवात्।
पारं तितीर्षतामद्य प्लवो नो भव माधव॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| माधव! आज हम सब लोगों के लिए, जो इस दुःख और संताप रूपी सागर से पार जाना चाहते हैं, कृपा करके नाव बनिए। इस संकट से केवल आप ही हमारी रक्षा कर सकते हैं।॥14॥ |
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| ‘Madhava! Today, please become the boat for all of us who wish to cross this ocean of sorrow and anger. Only you can save us from this crisis.॥ 14॥ |
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