श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 83: अर्जुनकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये युधिष्ठिरकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना और श्रीकृष्णका उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.83.13 
स तथा कुरु वार्ष्णेय यथा त्वयि मनो मम।
अर्जुनस्य यथा सत्या प्रतिज्ञा स्याच्चिकीर्षिता॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वार्ष्णेय! हमारा मन आपमें लगा हुआ है। अतः आप कुछ ऐसा कीजिए जिससे अर्जुन की अभीष्ट प्रतिज्ञा पूर्ण हो जाए॥13॥
 
Varshneya! Our mind is focused on you. So please do something so that Arjuna's desired promise comes true.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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