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श्लोक 7.83.11  |
त्वं हि राज्यविनाशं च द्विषद्भिश्च निराक्रियाम्।
क्लेशांश्च विविधान् कृष्ण सर्वांस्तानपि वेद न:॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| हे भगवान् कृष्ण! आप भली-भाँति जानते हैं कि हमारे शत्रुओं ने किस प्रकार हमारे राज्य का विनाश किया, हमारा अपमान किया और हमें नाना प्रकार के कष्ट पहुँचाए॥ 11॥ |
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| Lord Krishna! You know very well how our enemies destroyed our kingdom, insulted us and inflicted various kinds of suffering on us.॥ 11॥ |
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