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श्लोक 7.83.1  |
संजय उवाच
ततो युधिष्ठिरो राजा प्रतिनन्द्य जनार्दनम्।
उवाच परमप्रीत: कौन्तेयो देवकीसुतम्॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| संजय कहते हैं- राजन! तदनन्तर कुन्तीकुमार राजा युधिष्ठिर अत्यन्त प्रसन्न हुए और उन्होंने देवकीनन्दन जनार्दन को नमस्कार करके पूछा-॥ 1॥ |
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| Sanjay says- Rajan! Thereafter, Kuntikumar King Yudhishthir became very happy and greeted Devkinandan Janardan and asked -॥ 1॥ |
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