श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.82.34 
तत: प्रवेश्य वार्ष्णेयमुपवेश्य वरासने।
पूजयामास विधिवद् धर्मराजो युधिष्ठिर:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
फिर द्वारपाल ने भगवान कृष्ण को भीतर लाकर श्रेष्ठ आसन पर बिठाया, तत्पश्चात धर्मराज युधिष्ठिर ने स्वयं विधिपूर्वक उनका पूजन किया।
 
Then the gatekeeper brought Lord Krishna inside and made him sit on a superior seat. After that Dharmaraja Yudhishthir himself worshiped him ritually.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि प्रतिज्ञापर्वणि युधिष्ठिरसज्जतायां द्वॺशीतितमोऽध्याय:॥ ८२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत प्रतिज्ञापर्वमें युधिष्ठिरके सुसज्जित होनेसे सम्बन्ध रखनेवाला बयासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८२॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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