श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.82.3 
नर्तकाश्चाप्यनृत्यन्त जगुर्गीतानि गायका:।
कुरुवंशस्तवार्थानि मधुरं रक्तकण्ठिन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
नर्तकियाँ नाचने लगीं और गायक मधुर स्वर से कुरुकुल की स्तुति में मधुर गीत गाने लगा॥3॥
 
The dancers started dancing and the singer with a melodious voice started singing melodious songs in praise of Kurukula. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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