| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना » श्लोक 2 |
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| | | | श्लोक 7.82.2  | पठन्ति पाणिस्वनिका मागधा मधुपर्किका:।
वैतालिकाश्च सूताश्च तुष्टुवु: पुरुषर्षभम्॥ २॥ | | | | | | अनुवाद | | उस समय सूत, मगध और वैतालिक देश के लोग, जो गान गाते और मंगलमय बातें प्रस्तुत करते थे, तालियाँ बजाकर पुरुषोत्तम युधिष्ठिर की स्तुति करने लगे॥2॥ | | | | At that time, the people of Suta, Magadha and Vaitalik, who were singing songs and presenting auspicious things, started praising Yudhishthira, the best of men, by clapping their hands. 2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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