श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  7.82.18-19 
अलंकृतं चाश्वशतं वासांसीष्टाश्च दक्षिणा:॥ १८॥
तथा गा: कपिला दोग्ध्री: सवत्सा: पाण्डुनन्दन:।
हेमशृङ्गा रौप्यखुरा दत्त्वा चक्रे प्रदक्षिणम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इसके अतिरिक्त पाण्डवपुत्र ने ब्राह्मणों को सौ सुसज्जित घोड़े, सुन्दर वस्त्र, इच्छानुसार दक्षिणा और बछड़ों सहित बहुत-सी दूध देने वाली कपिला गौएँ दीं। उन गौओं के सींग सोने से मढ़े हुए थे और खुर चाँदी से मढ़े हुए थे। ये सब देकर युधिष्ठिर ने उनकी (गाय और ब्राह्मणों की) परिक्रमा की॥18-19॥
 
Besides this, the son of Pandava gave the Brahmins a hundred well-decorated horses, fine clothes, dakshina as per their wish and many milk-giving Kapila cows along with their calves. The horns of those cows were covered with gold and the hooves were covered with silver. After giving them all, Yudhishthira circumambulated them (cows and Brahmins).॥18-19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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