श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.82.16 
दान्तान् वेदव्रतस्नातान् स्नातानवभृथेषु च।
सहस्रानुचरान् सौरान् सहस्रं चाष्ट चापरान्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वे सब के सब संयमी, वेदों के अध्ययन में निपुण, यज्ञ स्नान से शुद्ध और सूर्यदेव के उपासक थे। उनकी संख्या एक हजार आठ थी और उनके साथ एक हजार सेवक थे॥16॥
 
All of them were self-controlled, expert in the study of Vedas, pure after taking bath in sacrificial fire and worshipper of Sun God. They were one thousand and eight in number and had one thousand attendants with them.॥16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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