श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.82.12 
हरिणा चन्दनेनाङ्गमुपलिप्य महाभुज:।
स्रग्वी चाक्लिष्टवसन: प्राङ्मुख: प्राञ्जलि: स्थित:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबाहु युधिष्ठिर ने अपने सम्पूर्ण शरीर पर चंदन का लेप लगाया, नये वस्त्र और पुष्पमाला धारण की तथा पूर्व दिशा की ओर मुख करके हाथ जोड़कर बैठ गये।
 
Then the mighty-armed Yudhishthira anointed all his body with sandalwood paste, put on new clothes and a garland of flowers and sat with folded hands facing east.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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