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श्लोक 7.82.12  |
हरिणा चन्दनेनाङ्गमुपलिप्य महाभुज:।
स्रग्वी चाक्लिष्टवसन: प्राङ्मुख: प्राञ्जलि: स्थित:॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् महाबाहु युधिष्ठिर ने अपने सम्पूर्ण शरीर पर चंदन का लेप लगाया, नये वस्त्र और पुष्पमाला धारण की तथा पूर्व दिशा की ओर मुख करके हाथ जोड़कर बैठ गये। |
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| Then the mighty-armed Yudhishthira anointed all his body with sandalwood paste, put on new clothes and a garland of flowers and sat with folded hands facing east. |
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