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mahabharat 7.82.10: सबसे पहले बलवान और सुशिक्षित पुरुषों ने उसके शरीर को सब प्रकार की औषधियों आदि से बने हुए लेप से अच्छी तरह मलकर, फिर उसे स्थिर और सुगन्धित जल से स्नान कराया॥10॥   |   mahabharat अध्याय 7.82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.82.10 
उत्सादित: कषायेण बलवद्भि: सुशिक्षितै:।
आप्लुत: साधिवासेन जलेन स सुगन्धिना॥ १०॥
 
 
अनुवाद
सबसे पहले बलवान और सुशिक्षित पुरुषों ने उसके शरीर को सब प्रकार की औषधियों आदि से बने हुए लेप से अच्छी तरह मलकर, फिर उसे स्थिर और सुगन्धित जल से स्नान कराया॥10॥
 
First of all, the strong and well-educated men rubbed his body thoroughly with a paste prepared from all the herbs etc. and then he took a bath in the settled and fragrant water.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)