श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.82.1 
संजय उवाच
तयो: संवदतोरेवं कृष्णदारुकयोस्तथा।
सात्यगाद् रजनी राजन्नथ राजाऽन्वबुध्यत॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! श्रीकृष्ण और दारुक उपरोक्त प्रकार से बातें करते-करते रात्रि बीत गई। उधर राजा युधिष्ठिर भी जाग गए।
 
Sanjaya says - O King! Shri Krishna and Daruk were talking in the above manner and the night passed. On the other hand, King Yudhishthira also woke up.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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