श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  7.80.55 
कृष्णार्जुनावूचतु:
नमो भवाय शर्वाय रुद्राय वरदाय च।
पशूनां पतये नित्यमुग्राय च कपर्दिने॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण और अर्जुन बोले - (सबको उत्पन्न करने वाले), शर्व (संहार करने वाले), रुद्र (दुःखों को दूर करने वाले), वर देने वाले, पशुपति (प्राणियों का पालन करने वाले), सदा भयंकर रूप वाले और जटाधारी भगवान शिव को नमस्कार है॥55॥
 
Shri Krishna and Arjun said - Salutations to Lord Shiva (the creator of all), Sharva (the destroyer), Rudra (the remover of sorrows), the giver of blessings, Pashupati (the nurturer of living beings), the one who is always in the fierce form and the one who has the matted hair. 55॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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