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mahabharat 7.80.53-54: भगवान शंकर के ये वचन सुनकर धन्य महात्मा, परम बुद्धिमान श्रीकृष्ण और अर्जुन हाथ जोड़कर खड़े हो गए और भक्तिपूर्वक दिव्य स्तोत्रों द्वारा भगवान शिव की स्तुति करने लगे॥53-54॥   |   mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 53-54
 
 
श्लोक  7.80.53-54 
ततस्तद् वचनं श्रुत्वा प्रत्युत्थाय कृताञ्जली।
वासुदेवार्जुनौ शर्वं तुष्टुवाते महामती॥ ५३॥
भक्त्या स्तवेन दिव्येन महात्मानावनिन्दितौ॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
भगवान शंकर के ये वचन सुनकर धन्य महात्मा, परम बुद्धिमान श्रीकृष्ण और अर्जुन हाथ जोड़कर खड़े हो गए और भक्तिपूर्वक दिव्य स्तोत्रों द्वारा भगवान शिव की स्तुति करने लगे॥53-54॥
 
Hearing these words of Lord Shankar, the blessed Mahatma, the most intelligent Shri Krishna and Arjun stood with folded hands and started praising Lord Shiva with devotion through divine hymns. 53-54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)