श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  7.80.52 
येन कार्येण सम्प्राप्तौ युवां तत् साधयामि किम्।
व्रियतामात्मन: श्रेयस्तत् सर्वं प्रददानि वाम्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
तुम दोनों यहाँ किस काम से आए हो? मैं उसे पूरा करूँगा। कुछ ऐसा माँग लो जो तुम्हारे लिए लाभदायक हो। मैं तुम्हें सब कुछ दे सकता हूँ।'
 
What is the work for which you both have come here? I will accomplish it. Ask for something that is beneficial for you. I can give you everything.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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