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श्लोक 7.80.5  |
तत: कृष्णो महातेजा जानन् पार्थस्य निश्चयम्।
कुन्तीपुत्रमिदं वाक्यमासीन: स्थितमब्रवीत्॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| तब पार्थ का यह निश्चय जानकर महाबली श्रीकृष्ण एकान्त में आसन पर बैठ गए और खड़े होकर कुन्तीपुत्र से इस प्रकार बोले-॥5॥ |
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| Then, knowing this resolve of Partha, the mighty Sri Krishna sat alone on a seat and stood up and spoke to the son of Kunti thus -॥ 5॥ |
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