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mahabharat 7.80.5: तब पार्थ का यह निश्चय जानकर महाबली श्रीकृष्ण एकान्त में आसन पर बैठ गए और खड़े होकर कुन्तीपुत्र से इस प्रकार बोले-॥5॥   |   mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.80.5 
तत: कृष्णो महातेजा जानन् पार्थस्य निश्चयम्।
कुन्तीपुत्रमिदं वाक्यमासीन: स्थितमब्रवीत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तब पार्थ का यह निश्चय जानकर महाबली श्रीकृष्ण एकान्त में आसन पर बैठ गए और खड़े होकर कुन्तीपुत्र से इस प्रकार बोले-॥5॥
 
Then, knowing this resolve of Partha, the mighty Sri Krishna sat alone on a seat and stood up and spoke to the son of Kunti thus -॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)