श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  7.80.49 
अर्जुनश्चापि तं देवं भूयो भूयोऽप्यवन्दत।
ज्ञात्वा तं सर्वभूतादिं भूतभव्यभवोद्भवम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने भी महादेव को समस्त भूतों का मूल कारण तथा भूत, वर्तमान तथा भविष्य के जगतों का रचयिता जानकर बार-बार उनके चरणों में प्रणाम किया।
 
Knowing Him to be the root-cause of all beings and the creator of the past, present and future worlds, Arjuna too repeatedly bowed at the feet of Mahadeva. 49.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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