श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.80.48 
यं प्रपद्यन्ति विद्वांस: सूक्ष्माध्यात्मपदैषिण:।
तमजं कारणात्मानं जग्मतु: शरणं भवम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण और अर्जुन भी उसी कारण से अजन्मा भगवान शिव की शरण में गए थे, जिस कारण से सूक्ष्म अध्यात्म प्राप्ति की इच्छा रखने वाले विद्वान् लोग उनकी शरण में जाते हैं ॥48॥
 
Shri Krishna and Arjun also took refuge in the unborn Lord Shiva due to the same reason to whom scholars who aspire to attain subtle spirituality take refuge. 48॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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