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श्लोक 7.80.4  |
प्रत्युत्थाय च गोविन्दं स तस्मा आसनं ददौ।
न चासने स्वयं बुद्धिं बीभत्सुर्व्यदधात् तदा॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| अर्जुन ने खड़े होकर गोविन्द को बैठने के लिए आसन दिया, परन्तु स्वयं उस समय किसी आसन पर बैठने का विचार नहीं किया ॥4॥ |
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| Arjuna stood up and offered a seat to Govinda to sit but he himself did not think of sitting on any seat at that time. ॥ 4॥ |
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