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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  7.80.34-35h 
तस्मिन् शैले व्रजन् पार्थ: सकृष्ण: समवैक्षत।
शुभै: प्रस्रवणैर्जुष्टां हेमधातुविभूषिताम्॥ ३४॥
चन्द्ररश्मिप्रकाशाङ्गीं पृथिवीं पुरमालिनीम्।
 
 
अनुवाद
उस पर्वत की चोटी से जाते हुए श्रीकृष्ण सहित अर्जुन ने नीचे देखा कि नगरों और ग्रामों से सुशोभित, सुवर्णमय धातुओं से सुशोभित और सुन्दर झरनों से युक्त पृथ्वी के सम्पूर्ण भाग चन्द्रमा की किरणों से प्रकाशित हो रहे थे ॥34 1/2॥
 
While going from the top of that mountain, Arjun along with Shri Krishna looked down that the entire parts of the earth, adorned with cities and villages, adorned with golden metals and having beautiful waterfalls, were illuminated by the rays of the moon. 34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)