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श्लोक 7.80.27  |
कुबेरस्य विहारे च नलिनीं पद्मभूषिताम्।
सरिच्छ्रेष्ठां च तां गङ्गां वीक्षमाणो बहूदकाम्॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् उन्होंने कुबेर के बगीचे में कमलों से सुशोभित एक सरोवर तथा विशाल जल से परिपूर्ण नदियों में श्रेष्ठ गंगाजी को देखा॥27॥ |
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| Thereafter he saw in Kubera's garden a lake adorned with lotuses and the Ganga, the best among the rivers filled with vast water.॥ 27॥ |
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