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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.80.24 
पुण्यं हिमवत: पादं मणिमन्तं च पर्वतम्।
ज्योतिर्भिश्च समाकीर्णं सिद्धचारणसेवितम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
मैंने हिमालय के पवित्र शिखरों तथा सिद्धों और चारणों द्वारा सेवित, तेज से परिपूर्ण, बहुमूल्य पर्वतों को भी देखा।
 
I also saw the sacred peaks of the Himalayas and the precious mountain filled with radiance and served by the Siddhas and the Charanas. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)