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mahabharat 7.80.20-21: ‘यदि आज तू उस अस्त्र को जानता है, तो कल अवश्य ही जयद्रथ का वध कर सकेगा और यदि नहीं जानता, तो मन ही मन भगवान वृषभध्वज (शिव) की शरण ले। धनंजय! तू मन ही मन महादेवजी का ध्यान करता हुआ शान्त बैठ जा। तब उनकी कृपा और आशीर्वाद से तू उनका भक्त होने के कारण उस महान् अस्त्र को प्राप्त कर लेगा।’॥ 20-21॥   |   mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  7.80.20-21 
यदि तद् विदितं तेऽद्य श्वो हन्तासि जयद्रथम्।
अथाज्ञातं प्रपद्यस्व मनसा वृषभध्वजम्॥ २०॥
तं देवं मनसा ध्यात्वा जोषमास्व धनंजय।
ततस्तस्य प्रसादात् त्वं भक्त: प्राप्स्यसि तन्महत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
‘यदि आज तू उस अस्त्र को जानता है, तो कल अवश्य ही जयद्रथ का वध कर सकेगा और यदि नहीं जानता, तो मन ही मन भगवान वृषभध्वज (शिव) की शरण ले। धनंजय! तू मन ही मन महादेवजी का ध्यान करता हुआ शान्त बैठ जा। तब उनकी कृपा और आशीर्वाद से तू उनका भक्त होने के कारण उस महान् अस्त्र को प्राप्त कर लेगा।’॥ 20-21॥
 
‘If you know that weapon today, then you can surely kill Jayadratha tomorrow and if you do not know it, then take refuge in Lord Vrishabhadhwaj (Shiva) in your mind. Dhananjay! You sit quietly meditating on Mahadevji in your mind. Then, by his mercy and blessings, you will obtain that great weapon due to being his devotee.’॥ 20-21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)