श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.80.19 
पार्थ पाशुपतं नाम परमास्त्रं सनातनम्।
येन सर्वान् मृधे दैत्यान् जघ्ने देवो महेश्वर:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! पाशुपत नामक एक सनातन एवं उत्तम अस्त्र है, जिससे भगवान महेश्वर ने युद्ध में समस्त दैत्यों का वध किया था॥19॥
 
Partha! There is an eternal and excellent weapon called Pashupat, with which Lord Maheshwar had killed all the demons in the war.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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