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mahabharat 7.80.17-18: अर्जुन के शोक का आधार क्या था, यह सुनकर महापंडित गरुड़ध्वज कमलनयन भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करके पूर्वाभिमुख बैठकर पाण्डुपुत्र अर्जुन के कल्याण और सिन्धुराज जयद्रथ के वध के लिए इस प्रकार बोले- 17-18॥   |   mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  7.80.17-18 
शोकस्थानं तु तच्छ्रुत्वा पार्थस्य द्विजकेतन:।
संस्पृश्याम्भस्तत: कृष्ण: प्राङ्मुख: समवस्थित:॥ १७॥
इदं वाक्यं महातेजा बभाषे पुष्करेक्षण:।
हितार्थं पाण्डुपुत्रस्य सैन्धवस्य वधे कृती॥ १८॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन के शोक का आधार क्या था, यह सुनकर महापंडित गरुड़ध्वज कमलनयन भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करके पूर्वाभिमुख बैठकर पाण्डुपुत्र अर्जुन के कल्याण और सिन्धुराज जयद्रथ के वध के लिए इस प्रकार बोले- 17-18॥
 
Hearing what was the basis of Arjuna's grief, the great scholar Garuddhwaj Kamalanayan, after praying to Lord Shri Krishna, sat facing east and spoke thus for the welfare of Pandu's son Arjuna and the killing of Sindhuraj Jayadratha - 17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)