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श्लोक 7.80.16  |
दु:खोपायस्य मे वीर विकाङ्क्षा परिवर्तते।
द्रुतं च याति सविता तत एतद् ब्रवीम्यहम्॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| वीर! अब इस कठिन कार्य (जयद्रथ के वध) से मेरी इच्छा नष्ट हो रही है। इसके अतिरिक्त आजकल सूर्य शीघ्र अस्त हो जाता है, इसलिए मैं ऐसा कह रहा हूँ।॥16॥ |
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| ‘Valiant! Now my desire is changing from this difficult task (of killing Jayadratha). Besides this, the sun sets early these days; that is why I am saying this.'॥ 16॥ |
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