श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.80.15 
प्रतिज्ञापारणं चापि न भविष्यति केशव।
प्रतिज्ञायां च हीनायां कथं जीवेत मद्विध:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
केशव! ऐसी स्थिति में वचन पूरा नहीं हो सकता और यदि वचन भंग हो जाए तो मेरे जैसा मनुष्य कैसे जीवित रह सकता है?॥15॥
 
Keshav! In such a situation the promise cannot be fulfilled and if the promise is broken how can a man like me continue to live?॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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