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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन
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श्लोक 43
श्लोक
7.79.43
दारुक उवाच
जय एव ध्रुवस्तस्य कुत एव पराजय:।
यस्य त्वं पुरुषव्याघ्र सारथ्यमुपजग्मिवान्॥ ४३॥
अनुवाद
दारुक बोला- पुरुषसिंह! जिसके सारथी आप हैं, उसकी विजय निश्चित है। उसे कैसे पराजित किया जा सकता है?॥ 43॥
Daruk said— Purushsingh! The one whose charioteer you are, his victory is certain. How can he be defeated?॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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