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mahabharat 7.78.11: बेटा! मैं तुम्हारे सुन्दर, घावरहित मुख, बड़े-बड़े नेत्र, सुन्दर केश, मनोहर वचन और अद्भुत सुगन्ध वाले मुख को फिर कब देख सकूँगा?॥11॥   |   mahabharat अध्याय 7.78: सुभद्राका विलाप और श्रीकृष्णका सबको आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 78: सुभद्राका विलाप और श्रीकृष्णका सबको आश्वासन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.78.11 
विशालाक्षं सुकेशान्तं चारुवाक्यं सुगन्धि च।
तव पुत्र कदा भूयो मुखं द्रक्ष्यामि निर्व्रणम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
बेटा! मैं तुम्हारे सुन्दर, घावरहित मुख, बड़े-बड़े नेत्र, सुन्दर केश, मनोहर वचन और अद्भुत सुगन्ध वाले मुख को फिर कब देख सकूँगा?॥11॥
 
Son! When will I be able to see your beautiful, wound-free face with large eyes, lovely hair, charming words and wonderful fragrance again?॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)