श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 76: अर्जुनके वीरोचित वचन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.76.26 
संजय उवाच
एवमुक्त्वा हृषीकेशं स्वयमात्मानमात्मना।
संदिदेशार्जुनो नर्दन् वासवि: केशवं प्रभुम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! इन्द्रकुमार अर्जुन ने गर्जना करते हुए उपर्युक्त बातें कहकर अपने मन में विचार किया और सम्पूर्ण इन्द्रियों के नियन्ता तथा सब कुछ करने में समर्थ भगवान श्रीकृष्ण को इस प्रकार आदेश दिया- 26॥
 
Sanjay says- Rajan! Indrakumar Arjun, roaring and saying the above mentioned things, thought in his own mind and ordered Lord Shri Krishna, the controller of all the senses and capable of doing everything, in this manner - 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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