श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 76: अर्जुनके वीरोचित वचन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.76.23 
मावमंस्था ममास्त्राणि मावमंस्था धनुर्दृढम्।
मावमंस्था बलं बाह्वोर्मावमंस्था धनंजयम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मेरे अस्त्र-शस्त्रों का अनादर न करें। मेरे इस प्रबल धनुष की उपेक्षा न करें। इन दोनों भुजाओं के बल का तिरस्कार न करें और अपने मित्र धनंजय का अपमान न करें। ॥23॥
 
Lord! Do not disrespect my weapons. Do not ignore this strong bow of mine. Do not despise the strength of these two arms and do not insult your friend Dhananjay. ॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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