श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 76: अर्जुनके वीरोचित वचन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.76.16 
क्रव्यादांस्तर्पयिष्यामि द्रावयिष्यामि शात्रवान्।
सुहृदो नन्दयिष्यामि प्रमथिष्यामि सैन्धवम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कल मैं मांसभक्षी पशुओं को तृप्त करूँगा, शत्रु सेना को मारकर भगा दूँगा, अपने मित्रों को आनन्द दूँगा और समुद्रदेवता जयद्रथ को कुचल दूँगा॥ 16॥
 
Tomorrow I shall satisfy the carnivorous animals, kill and drive away the enemy forces, give joy to my friends and crush the ocean-god Jayadratha.॥ 16॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas