श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 76: अर्जुनके वीरोचित वचन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.76.11 
नरनागाश्वदेहेभ्यो विस्रविष्यति शोणितम्।
पतद्‍भ्य: पतितेभ्यश्च विभिन्नेभ्य: शितै: शरै:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
मेरे तीखे बाणों से बिंधकर गिरे हुए मनुष्य, हाथी और घोड़ों के शरीरों से रक्त की धाराएँ बहने लगेंगी ॥11॥
 
Streams of blood will flow from the bodies of men, elephants and horses that fall after being pierced by my sharp arrows. ॥11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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