श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 74: जयद्रथका भय तथा दुर्योधन और द्रोणाचार्यका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  7.74.7-8 
द्रोणदुर्योधनकृपा: कर्णमद्रेशबाह्लिका:।
दु:शासनादय: शक्तास्त्रातुं मामन्तकार्दितम्॥ ७॥
किमङ्ग पुनरेकेन फाल्गुनेन जिघांसता।
न त्रायेयुर्भवन्तो मां समस्ता: पतय: क्षिते:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘द्रोणाचार्य, दुर्योधन, कृपाचार्य, कर्ण, मद्रराज शल्य, बाह्लीक और दु:शासन आदि वीर योद्धा मुझे यमराज के भय से बचाने में समर्थ हैं। हे राजन! जब अर्जुन ही मुझे मारना चाहता है, तब तुम सब राजा लोग उसके हाथों से मेरी रक्षा क्यों नहीं कर सकते?॥ 7-8॥
 
‘Dronacharya, Duryodhan, Kripacharya, Karna, Madraraj Shalya, Bahlik and Dushasan and other brave warriors are capable of saving me from the danger of Yamraj. Dear kings! Then when Arjuna alone wants to kill me, then why can't all of you kings protect me from his hands?॥ 7-8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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