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श्लोक 7.74.22  |
उपसंग्रहणं कृत्वा द्रोणाय स विशाम्पते।
उपोपविश्य प्रणत: पर्यपृच्छदिदं तदा॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| महाराज ! उस समय उसने द्रोणाचार्य के चरण स्पर्श करके विधिपूर्वक प्रणाम किया और उनके पास बैठकर आदरपूर्वक पूछा -॥22॥ |
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| Maharaj! At that time he touched the feet of Dronacharya and bowed down ritually and sitting near him he asked with reverence -॥ 22॥ |
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