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mahabharat 7.73.d5: हे पुरुषोत्तम! आपका यह कथन अत्यंत अर्थपूर्ण और मुझे अत्यंत प्रिय है। यह अत्यंत प्रभावशाली कथन आपके पुत्र के लिए विलाप कर रहे और आपके गले में पड़ी सुंदर माला को कुचलने वाले लोगों की क्रोधित भीड़ को शांत कर रहा है।   |   mahabharat अध्याय 7.73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा  »  श्लोक d5
 
 
श्लोक  7.73.d5 
अथ मृदिततमाग्रॺदाममाल्यं
तव सुतशोकमयं च रोषजातम्।
व्यपनुदति महाप्रभावमेत-
न्नरवर वाक्यमिदं महार्थमिष्टम्॥)
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! आपका यह कथन अत्यंत अर्थपूर्ण और मुझे अत्यंत प्रिय है। यह अत्यंत प्रभावशाली कथन आपके पुत्र के लिए विलाप कर रहे और आपके गले में पड़ी सुंदर माला को कुचलने वाले लोगों की क्रोधित भीड़ को शांत कर रहा है।
 
Best of men! This statement of yours is full of great meaning and is very dear to me. This very impressive statement is calming down the angry crowd of people who are mourning for your son and have crushed the beautiful garland around your neck.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि प्रतिज्ञापर्वणि अर्जुनप्रतिज्ञायां त्रिसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत प्रतिज्ञापर्वमें अर्जुनप्रतिज्ञाविषयक तिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७३॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ५७ १/२ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)