श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.73.22 
धार्तराष्ट्रप्रियकरं मयि विस्मृतसौहृदम्।
पापं बालवधे हेतुं श्वोऽस्मि हन्ता जयद्रथम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जो धृतराष्ट्र के पुत्रों से प्रेम करने वाला, मेरे प्रति अपनी मित्रता भूल गया है और जो बालक अभिमन्यु के वध का कारण है, उस पापी जयद्रथ को मैं कल अवश्य मार डालूँगा॥22॥
 
Tomorrow I will certainly kill that sinful Jayadratha who is loving the sons of Dhritarashtra, who has forgotten his friendship towards me and who is the reason behind the killing of child Abhimanyu. ॥22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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